ग्लोबल ऑथर अवॉर्ड 2026 में उर्दू और अरबी को मिला बड़ा मंच
अदब और इल्म की दुनिया में कुछ फैसले ऐसे होते हैं जो सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत साबित होते हैं। ग्लोबल ऑथर अवॉर्ड 2026 में उर्दू और अरबी भाषा की किताबों को शामिल किया जाना भी ऐसा ही एक अहम कदम है। इससे दुनिया भर के उर्दू और अरबी लिखने वाले लेखकों को अपनी किताबें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेश करने का मौका मिलेगा।
नेपाल में आयोजित होने वाला ग्लोबल ऑथर अवॉर्ड कई सालों से अलग-अलग देशों और भाषाओं के लेखकों को एक मंच देता आ रहा है। लेकिन अब तक उर्दू और अरबी जैसी बड़ी और समृद्ध भाषाएं इस अवॉर्ड का हिस्सा नहीं थीं। इस वजह से इन भाषाओं से जुड़े कई लेखक और शोधकर्ता अपनी रचनाओं को इस मंच तक नहीं पहुंचा पाते थे।
इस सिलसिले में डॉ. मोहम्मद साजिद अहमद अलीमी की कोशिशें काबिले-तारीफ रहीं। उन्होंने लगातार यह बात उठाई कि उर्दू और अरबी जैसी अहम भाषाओं को भी अंतरराष्ट्रीय साहित्यिक मंचों पर जगह मिलनी चाहिए। उनका मानना था कि अगर किसी मंच का मकसद दुनिया भर के साहित्य और लेखकों को साथ लाना है, तो इन भाषाओं को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता।
डॉ. अलीमी ने आयोजकों से बातचीत और विभिन्न माध्यमों से अपनी बात पहुंचाई। उन्होंने बताया कि अरबी दुनिया की अहम इल्मी भाषाओं में से एक है, जबकि उर्दू करोड़ों लोगों की तहज़ीब, अदब और जज़्बात की ज़ुबान है। आखिरकार उनकी कोशिशें रंग लाईं और ग्लोबल ऑथर अवॉर्ड 2026 में उर्दू और अरबी किताबों की भागीदारी का रास्ता खुल गया।
इस फैसले का दुनिया भर के उर्दू और अरबी लेखकों ने स्वागत किया है। इससे न सिर्फ लेखकों को अपनी रचनाएं वैश्विक स्तर पर पेश करने का मौका मिलेगा, बल्कि अलग-अलग भाषाओं और संस्कृतियों के बीच रिश्ते भी मजबूत होंगे।
गौरतलब है कि इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में नेपाल, भारत, थाईलैंड, अमेरिका, जापान और क़तर समेत कई देशों के लेखक और साहित्यकार हिस्सा लेने वाले हैं। ऐसे में उर्दू और अरबी भाषाओं का शामिल होना एक बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, जो आने वाले समय में इन भाषाओं के लेखकों के लिए नए अवसर पैदा करेगा।